मूक-बधिरों की 'आवाज' बने ज्ञानेन्द्र पुरोहित
2019-09-20 0 Dailymotion
कहते हैं अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो हर काम आसान हो जाता है। ऐसी ही कहानी है ज्ञानेन्द्र पुरोहित की जिन्होंने समाज के ऐसे तबके को अपनी आवाज दी, जो न तो मुंह से बोल सकता है और न कानों से सुन सकता है।