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वे फिर लौटेंगे- मुकेश कुमार I Migrant Workers I Lockdown I COVID 19 I

2021-06-03 3 Dailymotion

सिर पर गठरियाँ रखे<br />कंधों पर गृहस्थी उठाए<br />गोद में बच्चे लिए, सिर झुकाए <br />बसों की छतों पर लदकर <br />ट्रेनों में ठसाठस भरकर<br />थके, हारे, <br />बेबस, बेचारे<br />वे फिर लौटेंगे<br /><br />चले गए थे वे खामोशी से<br />कोई शिकायत नहीं की, कोई विरोध नहीं किया<br />जुलूस नहीं निकाला, धरना नहीं दिया <br />किसी को मजबूरियाँ नहीं बताईँ<br />गुहार भी नहीं लगाई<br />पता था सुनी जाती है केवल उनकी<br />पुलिस, अदालतें, सरकार हैं जिनकी<br />बाशिंदे होकर भी बेगाने थे शहर के लिए<br />अभिशप्त थे बार-बार उजड़ने जाने के लिए<br />उन्हें तो यूँ जाने के लिए भी नहीं बख्शा जाएगा<br />लाठियों, गोलियों से नवाज़ा जाएगा<br />इसलिए चले गए लाचारी का ढिंढोरा पीटे बगैर<br />पीछे छूटते शहर की मनाते हुए ख़ैर<br /><br />वे फिर लौटेंगे <br />उसी एहसान फरामोश शहर में जीने-मरने<br />उसी नरक को ग़ुलज़ार करने<br />जहाँ से बेआबरू होकर निकल गए थे<br />तमाम रिश्ते पल भर में पिघल गए थे <br />मजबूर हैं बार-बार वहीं ठिकाना बनाने <br />उन्हीं अनजाने, अनचाहे लोगों में बस जाने <br />जो किसी भी दिन अपनी सलामती के लिए<br />फिर उन्हें मुसीबतों में धकेल देंगे<br />शहर से बाहर के रास्तों पर ठेल देंगे<br /><br />वे आते ही जुट जाएँगे काम पर चुपचाप<br />हमारी हमदर्दियों पर हाँ हूँ करते <br />पी जाएंगे आँसू, दबा जाएंगे संताप<br />ज़ाहिर नहीं करेंगे अविश्वास<br />नहीं करेंगे ज़रा भी कड़वी बात<br />वे सुनाएंगे अपनी आप बीती <br />कैसे गुज़रा ये संकट का समय<br />कैसे ज़िंदगी की जंग जीती<br />मगर नहीं चाहेंगे आपकी दया<br />आपको क्या दिखाएं पाँव के छाले, दिल के घाव<br />आपके लिए तो ये भी है एक किस्म का मन बहलाव<br /><br />वे फिर लौटेंगे<br />उनके आते ही गूँजने लगेंगे<br />घर दुकान दफ्तर, उद्योग-धंधे<br />कितने ही बीमार होने लगेंगे भले चंगे<br />उनके हाथ-पाँव की हरकतों से<br />मुर्दा सड़कें जाग जाएंगी<br />ज़ख़्मी जिंदगी दर्द के साथ मुस्कराएगी<br />लोग राहत की साँस लेंगे<br />फिर से भविष्य के सपने बुनेंगे<br />शहर का दिल धड़कने लगेगा<br />मगर स्वार्थों के कोलाहल में कोई नहीं सुनेगा<br />उनके टूटे दिलों में अनवरत् बजता <br />किसी विषधर सा डसता<br />एक अंतहीन विलंबित शोक-गीत।

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