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मज़दूर दिवस: 'काम के घंटे आठ करो'

2021-11-10 129 Dailymotion

19वीं सदी की औद्योगिक क्रांति के बाद अमेरिका और यूरोप के<br />तमाम देशों में उद्योग धंधों और कामकाजी मजदूर वर्ग का<br />तेजी से विस्तार हुआ. इससे लोगों को रोजगार तो मिला लेकिन<br />उनके अधिकार बहुत सीमित थे. काम करने के घंटों की कोई<br />सीमा नहीं थी. पैसे में कटौती आम बात थी. मशहूर लेखक<br />अलेक्जेंडर ट्रेक्टनबर्ग ने अपनी किताब मई दिवस का इतिहास<br />में लिखा है, "तब कारखानों में मज़दूर चौदह, सोलह, अट्ठारह घंटे<br />काम किया करते थे. यह आम बात थी." जल्द ही मज़दूर इस<br />शोषण के खिलाफ संगठित होने लगे. 1880 के आस-पास ही<br />अमेरिका के अलग-अलग शहरों में कामगार और मजदूर संगठनों<br />ने काम के वक्त को आठ घंटे तक सीमित करने के लिए छोटे-मोटे आंदोलन शुरू कर दिए थे.

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