अपनी तमाम गलतबयानियों, अपमानजनक टिप्पणियों के बावजूद संबित पात्रा ज्यादातर चैनलों और मीडिया के ईवेंट की आंखों का तारा बने हुए हैं. अमूमन सार्वजनिक जीवन में बड़बोले, मुंहफट लोगों को मुख्यधारा का मीडिया समय के साथ दरकिनार कर देता है. लेकिन संबित इस मामले में अपवाद हैं.<br /><br />यहां हम कोई निष्कर्ष दिए बिना चाहते हैं कि दर्शक खुद वीडियो देखें और तय करें कि क्या बिना किसी सबूत या आधार के किसी को गद्दार, आतंकवादी, ढोंगी करार देना आपराधिक नहीं है? टीवी चैनलों की सार्वजनिक बहसों का स्तर इतना गिराने और पात्रा जैसे बदजुबान लोगों को आमंत्रित करने के लिए खुद टीवी पत्रकार कितने जिम्मेदार हैं?
