ओंकारेश्वर को देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथे स्थान पर माना जाता है। ओंकारेश्वर तीर्थ अलौकिक है। यह तीर्थ नर्मदा नदी के किनारे विद्यमान है। नर्मदा नदी के दो धाराओं के बंटने से एक टापू का निर्माण हुआ था, जिसका नाम मांधाता पर्वत पड़ा। आज इसे शिवपुरी भी कहा जाता है। इसी पर्वत पर भगवान ओंकारेश्वर महादेव विराजमान हैं। मान्यता है कि भगवान राम के 10 पीढ़ी पूर्व के महाराजा मांधाता ने भगवान शिव की तपस्या की। भगवान प्रसन्न होकर ओंकारेश्वर में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। विश्वभर के श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं।
