मैं ना जाने कितने समय से बादलों से ढके आकाश के नीचे उस जमीन पर अकेला घूम रहा था.<br /><br />मैं उस जगह पर बिलकुल अकेला ही था और कुछ भी मनोरंजक नहीं था.<br /><br />आखिर तंग आकर मैंने हाथ जोड़कर प्रभु से कहा,"प्रभु, क्या मैं ये स्वर्ग छोड़कर जा सकता हूँ?"<br /><br />प्रभु मुस्कुराये और बोले,"तुमने ये कैसे सोच लिया के तुम स्वर्ग में हो?"
