विकट परिस्थिथियाँ आने पर, चिंता करना बड़ी अज्ञानता और अहंकार है। इन परस्थितियों में, स्वीकार ना कर पाना और अपने बस के बहार होते हुए भी परिस्थितियों को अपने तरीके से सुलझाने जाना लाभ दायक नही होता है।कुदरत में जो हो रहा है, उसमें बदलाव लाने का प्रयास करना, अहंकार है। परिस्थितियों को बदलने के बदले उनका स्वीकार कर लेने से हमें कम भुगतना होगा। भविष्य और भूतकाल के बारेमें जो भी हम सोचते है वह मात्र कल्पनाएँ ही है जिनको उखेड कर फेंक देना चाहिए। समजदारी इसी में है की हम चिंता करने में अपनी शक्तियाँ खोने के बदले जो आने वाला है उनपर अपनी शक्तियों का उपयोग करें।
