♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें:<br />https://acharyaprashant.org/hi/enquir...<br /><br /> आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?<br />फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?...<br /><br />➖➖➖➖➖➖<br /><br />#acharyaprashant<br /><br />वीडियो जानकारी: 30.09.23, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा <br /><br />प्रसंग: <br />~ श्रद्धा क्या है?<br />~ अश्रद्धा क्या है?<br />~ श्रद्धालु होने के लिए निष्काम होना क्यों जरूरी है?<br />~ आम आदमी में श्रद्धा असंभव क्यों होती है?<br /><br />श्रद्धा : जो कर्म मुझे अपनी अधिकतम सत्यनिष्ठा के साथ सही लग रहा है वह करूँगा, फिर जो परिणाम आएगा उसी परिणाम को शुभ मानूँगा।<br /><br />श्रद्धा : अपनी सीमित क्षमता लेकिन पूरी सत्यनिष्ठा के साथ मैं कर्म करता हूँ।<br /><br />नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन । <br />यमेवैश वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनुमं स्वम् ।। <br />कठोपनिषद - 12.23<br /><br />अनुवाद: यह आत्मा न तो वेदों के अध्ययन से, न बुद्धि से, न बहुत सुनने से प्राप्त होती है, अपितु जो इसे जानना चाहता है, वही इसे प्राप्त कर सकता है। यह आत्मा उसे अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट करती है।<br /><br />जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही। <br />ते घर मरघट जानिए, भुत बसे तिन माही ।। <br />संत कबीर<br /><br />दास कबीर जतन करि ओढी, ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया ॥<br />संत कबीर<br /><br />संगीत: मिलिंद दाते<br />~~~~~
