<p>असम के सोनितपुर जिले के बोरसोला में चाय उगाने वाले किसान मुश्किलों से जूझ रहे हैं. कई किसानों का दावा है कि उनकी उपज के लिए मिलने वाली कीमतें अचानक गिर गई हैं. किसान असम सरकार से चायपत्ती के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की गुजारिश कर रहे हैं, ताकि उनकी आमदनी पर असर न पड़े. छोटे किसान अपनी चाय की पत्तियां बीएलएफ यानी 'बॉट लीफ फैक्ट्रीज' को बेचते हैं। हालांकि उनका आरोप है कि उन्हें अपनी उपज की सही कीमत नहीं मिल रही है. 'बॉट लीफ फैक्ट्रीज' चाय पत्तियां खुद नहीं उगाती हैं. वे छोटे चाय उत्पादकों से ताजी हरी पत्तियां खरीदते हैं और फिर उन्हें प्रॉसेस कर चाय बनाते हैं और उसे बेचते हैं. बोरसोला के ज्यादातर किसानों के लिए चाय की खेती आय का मुख्य जरिया है. अब वे भारतीय चाय बोर्ड और असम सरकार से तुरंत दखल और जरूरी मदद देने की अपील कर रहे हैं.</p>