<p>तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में, खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, जीने का तरीका है. घी में भीगी इडली और तीखे चिकन-65 से लेकर चाशनी भरी जलेबी और मुलायम गुलाब जामुन तक, अलग-अलग प्लेट की खासियत हैं. सांभर और डोसा अब भी लोगों का मुख्य आहार हैं, लेकिन शहर में पनप रही नई खाद्य संस्कृति में पारंपरिक के साथ-साथ नए जायके भी शामिल हो रहे हैं. यहां एक गिलास नींबू पानी जैसी साधारण चीज भी काफी मायने रखती है. चेन्नई में बेशक महंगे रेस्टोरेंट भरे हुए हैं, लेकिन इसकी आत्मा चहल-पहल भरी गलियों और समुद्र तटों पर सादे, किफायती भोजनालयों में ही बसती है. पॉप-अप रेस्टोरेंट, फूड ट्रक और थीम वाले कैफे लंबे समय से शहर की खाद्य संस्कृति का हिस्सा रहे हैं. इनमें हर किसी के लिए साफ-सुथरा खाना उपलब्ध होता है. साधारण बिरयानी भी अब तीखी अंबुर शैली की सुगंधित डिंडीगुल बिरयानी में बदल गई है. इससे चेन्नई में चौबीसों घंटे खुले रहने वाले बिरयानी स्टोर में चार चांद लग गए हैं. ट्रिप्लिकेन में खास कर ऑटो ड्राइवरों को मालूम होता है कि कहां आधी रात को ठेलागाड़ियों पर मटन मिल सकता है और कहां चाय की दुकानें सुबह चार बजे गर्मागरम बन-बटर-जैम खिलाती हैं. साफ है कि चेन्नई में न सिर्फ पेट भरने के लिए, बल्कि आत्मा को तृप्त करने वाले आहार हैं. शहर में 22 अगस्त को चेन्नई दिवस मनाने की तैयारियां चल रही हैं. इसके साथ ही जायकेदार और विविधतापूर्ण आहार की तैयारियां भी परवान चढ़ रही हैं. </p>