<p>जगदलपुर के मां दंतेश्वीर मंदिर में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मनाया गया. बुधवार की रात को मावली परघाव की रस्म अदा की गई. इस रस्म को दो देवियो के मिलन के रूप में जाना जाता है. जगदलपुर के दन्तेश्वरी मंदिर प्रांगण और कुटरूबाड़ा के पास पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाया गया. 600 साल से चली आ रही .बस्तर दशहरे की परंपराओं में बस्तर का राजपरिवार भी शामिल होता है. मां दंतेश्वीर को बस्तर दशहरे में शामिल होने के निमंत्रण, माता की डोली के स्वागत और फिरो डोली को लाना, सभी परंपराओं में राज परिवार के सदस्य शामिल होते हैं. बस्तर दशहरे को देखने के देश के कोने-कोने तक से लोग पहुंचते हैं और ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनते हैं.</p>
