📖 सूरह अल-नम्ल (27:91-92) का संदेश 📖 <br />🌟 आयत 91: <br />"कहो, 'मुझे तो बस यह हुक्म दिया गया है कि मैं इस नगर (मक्का) के रब की इबादत करूं, जिसे उसने हरम (पवित्र) बनाया, और उसी का है हर चीज़। और मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं मुसलमानों में से हो जाऊं।'" <br />🌟 आयत 92: <br />"और यह कि मैं कुरआन पढ़कर सुनाऊं। फिर जो कोई हिदायत पाए, वह अपनी भलाई के लिए हिदायत पाएगा, और जो गुमराह हो, तो कह दो, 'मैं तो बस डराने वालों में से हूँ।'" <br />✨ संदेश: <br />ये आयतें हमें एकेश्वरवाद (तौहीद) और कुरआन के मार्गदर्शन की अहमियत सिखाती हैं। मक्का की पवित्रता और अल्लाह की इबादत का आदेश हमें सच्चाई और समर्पण का रास्ता दिखाता है। कुरआन को पढ़ने और समझने का हुक्म है, लेकिन हिदायत पाना या गुमराह होना हमारी अपनी जिम्मेदारी है। आइए, कुरआन के इस खूबसूरत संदेश को अपने जीवन में उतारें और सही रास्ते पर चलें। 🤲 <br />📢 आपके विचार? कुरआन की इन आयतों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है? कमेंट में शेयर करें! 💬 <br />#कुरआन #इस्लाम #हिदायत #तौहीद #मक्का
