<p>क्या अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सबसे बड़ी चाल चल दी है. राष्ट्रपति ट्रम्प ने सऊदी अरब को 'मेजर नॉन-नाटो अलाय' घोषित किया, एक दर्जा जो अब तक केवल 19 देशों को मिला है. इसका मतलब सिर्फ हथियार और निवेश नहीं, यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश है.</p><p>व्हाइट हाउस में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का भव्य स्वागत किया गया. यह उनका सात साल में पहला व्हाइट हाउस दौरा था. ट्रम्प ने इस ऐलान के जरिए अमेरिका और सऊदी अरब के सैन्य और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम रखा है.</p><p>इस दर्जे का मतलब है कि सऊदी अरब अब अमेरिका से सैन्य सहयोग, हथियार और तकनीकी सहायता का लाभ उठा सकेगा. अमेरिकी प्रशासन पहले ही F-35 फाइटर जेट्स और लगभग 300 टैंकों की बिक्री की घोषणा कर चुका है. </p><p>2018 में वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या ने अमेरिकी-सऊदी संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया था. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने क्राउन प्रिंस पर इस हत्या में शामिल होने का संदेह जताया था. लेकिन ट्रम्प ने साफ कहा कि क्राउन प्रिंस का इसमें कोई हाथ नहीं था. </p><p>इस ऐलान को अमेरिकी-सऊदी रिश्तों में एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है. ट्रम्प के इस कदम से दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग और मजबूत होगा.</p><p>क्राउन प्रिंस ने अमेरिका में निवेश बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा की, जो पहले 600 अरब डॉलर था. उन्होंने अमेरिका को विदेशी निवेश के लिए 'पृथ्वी का सबसे हॉट देश' बताया और ट्रम्प की तारीफ की.</p><p>सऊदी अरब को यह दर्जा देने का मतलब है कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपने रणनीतिक हितों को मजबूत कर रहा है. दोनों देशों ने पूंजी बाजार, महत्वपूर्ण खनिज, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्त पोषण के खिलाफ सहयोग के समझौते किए हैं.</p><p>ये कदम केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं हैं। सऊदी अरब मध्य पूर्व की राजनीति में एक अहम खिलाड़ी है. अमेरिका की ये पहल क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक साझेदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.</p>
