<p>आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा के साई गोपी ने आईटी जॉब छोड़कर अपना परंपरागत पेशा अपनाया. वो चाक पर मिट्टी के बर्तन बना रहे हैं. आईटी जॉब के प्रेशर के चलते उन्होंने वो करियर छोड़ा और फैमिली क्राफ्ट को जीवित रखने ने अपना परंपरागत पेशा अपनाया. इस पेशे में उनकी आमदनी दुगुनी हो गई है. साई गोपी के मुताबिक, सॉफ्टवेयर में वो पचास हजार रुपये कमाते थे, लेकिन अब वो एक लाख रुपये कमा रहे हैं. हालांकि साई गोपी को पैसे से ज्यादा... यहां शांति, बेहतर सेहत और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी चीजें मिलीं. पॉटरी का काम इन्हें एक्टिव रखता है और परिवार वाले भी सुकून से रहते हैं. साई गोपी की कहानी बताती है कि सफलता सिर्फ ऊंची-ऊंची इमारतों और कॉर्पोरेट दफ्तरों में ही कैद होकर नहीं रहती है.. कभी कभी वह लोगों के जुनून और हिम्मत के पीछे भी रहती है.</p>
