आख़िरी शो – जो कभी ख़त्म नहीं होता”<br />शहर के बाहरी हिस्से में बना विजय टॉकीज़ पिछले 15 सालों से बंद था। लोग कहते थे कि जिस रात यह सिनेमा बंद हुआ था, उस रात आख़िरी शो पूरा नहीं हो पाया। फिल्म चल रही थी, तभी अचानक चीखें गूंजीं, लाइटें बुझ गईं… और अगली सुबह हॉल के अंदर 27 लोग मरे हुए मिले।<br />कोई ज़ख्म नहीं।<br />कोई खून नहीं।<br />बस सबकी आँखें खुली हुई… जैसे अब भी कुछ देख रहे हों।<br />आर्यन को इन बातों पर यक़ीन नहीं था। वह यूट्यूब के लिए “रियल हॉरर लोकेशन” पर वीडियो बनाता था। विजय टॉकीज़ उसके लिए परफेक्ट कंटेंट था।
