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swm: आसमां से बरसा वरदान, किसानों को प्रतिबीघा तीन हजार रुपए तक का मिला लाभ

2026-01-06 16 Dailymotion

सवाईमाधोपुर. इन दिनों आसमान में बरस रहा अमृत किसानाें के लिए बरदान साबित हो रहा है। गत दिनों मावठ व अब कोहरे के साथ कड़ाके की सर्दी ने किसानों के रबी की फसलाें में चमक बिखेर दी है। इस बारिश ने न केवल फसलों को संजीवनी दी बल्कि किसानों को एक सिंचाई की बिजली, डीजल और पानी की भारी बचत भी कराई है।<br /><br />गत दिनों हुई मावठ की बारिश किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रही। इस बारिश ने रबी फसलों को जीवनदायिनी नमी दी है और किसानों को सिंचाई लागत में बड़ी राहत मिली है। कृषि विभाग के अनुसार मावठ से गेहूं, चना, सरसों सहित अन्य रबी फसलों की बढ़वार में सुधार हुआ है। मिट्टी में पर्याप्त नमी आने से फसलों की जड़ें मजबूत हुई हैं और पहले से डाले गए उर्वरकों की उपयोगिता भी बढ़ी है।<br />सिंचाई लागत में हुई बचत<br />मावठ के कारण किसानों को एक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। इससे प्रति बीघा लगभग तीन हजार रुपए तक की बिजली, डीजल और पानी की सीधी बचत हुई है। बेहतर बढ़वार के चलते उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हैक्टेयर (एक बीघा) में एक बार सिंचाई का खर्चा करीब तीन हजार रुपए आता है। ऐसे में गेहूं, जौ, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों में एक पानी लगने से किसानों को सीधे-सीधे लाखों से अधिक का फायदा होने का अनुमान है। इस वर्ष जिले में रबी बुवाई का लक्ष्य दो लाख 93 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में रखा गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मावठ से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की लागत भी घटेगी। इससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।<br />फसलों के लिए जीवदायिनी<br />मावठ को पारंपरिक रूप से रबी फसलों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। गत दिनों हुई रुक-रुककर बारिश से खेतों में एक पानी की पूर्ति हो गई थी। गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलें इस समय पानी की सबसे अधिक जरूरत में थीं। ऐसे में यह बारिश व कोहरा किसानों की मेहनत को संबल देने वाली साबित हुई है। वहीं बिजली किल्लत से सिंचाई में आ रही परेशानी से भी राहत मिली है।<br /><br />...............<br />ये बोले किसान...<br /><br />फसलों को मिली संजीवनी<br /><br />“मावठ की बारिश से हमारी गेहूं और चना की फसलें संजीवनी मिली है। प्रतिबीघा करीब दो से ढाई हजार रुपए की बचत हुई है। हमें सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाना पड़ता था, जिससे काफी खर्च होता था। इस बार पानी की जरूरत पूरी हो गई है और लागत बची है। उम्मीद है कि उत्पादन भी बढ़ेगा। प<br />श्रीनारायण मीना, किसान, निवासी हस्तगंज<br /><br />मावठ से खेतों में बनी नमी<br /><br />“बिजली की किल्लत के बीच यह बारिश हमारे लिए राहत लेकर आई है। इससे प्रति बीघा में तीन हजार रुपए का लाभ मिला है। सरसों की फसल में पानी की कमी से चिंता थी, लेकिन मावठ ने खेतों को नमी दी है। इससे फसलें अब अच्छी तरह बढ़ेंगी और हमें अतिरिक्त आमदनी मिलेगी।”<br />जानकीलाल मीणा, किसान निवासी सूरवाल<br /><br />....................<br />इनका कहना<br /><br />मावठ के साथ आई ठंड और कोहरे ने फसलों की ग्रोथ को और बेहतर किया है। प्रति बीघा ढाई से तीन हजार रुपए तक फायदा मिला है।मावठ की वर्षा रबी फसलों के लिए क्रिटिकल स्टेज पर अत्यंत उपयोगी होती है। इससे मृदा नमी, उर्वरक दक्षता एवं तापमान संतुलन सुधरता है, जिसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ता है। खेत में नमी बने रहने से पाले से नुकसान भी नहीं होगा।”<br />इससे मृदा नमी, उर्वरक दक्षता एवं तापमान संतुलन सुधरता है, जिसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ता है। खेत में नमी बने रहने से पाले से नुकसान भी नहीं होगा।<br /><br />विजय जैन, सहायक कृषि अधिकारी, चौथकाबरवाड़ा

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