<p>किसी देवी-देवता की मूर्ति हो या राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति... चाहे मोर की कलाकृति हो या फूलों का गुलदस्ता... यह देखने में इतना सुंदर है कि नजरें हटाने का मन नहीं करता. जो भी इसे देखता है, एक पल के लिए रुक जाता है और इन कलाकृतियों को निहारता रहता है. यह सब देखकर मन में आता है, वाह... कितनी सुंदर चीज है.</p><p>हालांकि, ये सभी सुंदर कलाकृतियां बांस से बनी हैं. इस कला के पीछे जिस कारीगर ने सबका ध्यान खींचा, वह हैं एकादशी बरीक. एकादशी न केवल बांस से कलाकृतियां बनाते हैं, बल्कि उन्होंने देश-विदेश में कई लोगों को बांस के प्रोडक्ट बनाने की कला सिखाई है और उन्हें रोजी-रोटी कमाने का रास्ता भी दिखाया है.</p><p>ओडिशा के कटक जिले में बांकी क्षेत्र के तालाबस्ता गांव के 56 साल के एकादशी बरीक 44 साल से बांस से कलाकृतियां और घरेलू उपयोग के सामान बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं. परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने की वजह से एकादशी पढ़ाई नहीं कर पाए और बचपन से ही उन्होंने बांस को अपनी कमाई का जरिया बनाया.</p><p>1981 में उन्होंने बांस से उपयोगी सामान बनाने की ट्रेनिंग ली. 1982 में उन्होंने बांस से सामान बनाना शुरू किया. उन्होंने 1984 से बच्चों को ट्रेनिंग देना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने खुद बांस से आर्ट बनाया और सरकारी और प्राइवेट लेवल पर अलग-अलग संस्थानों में बच्चों को ट्रेनिंग दी. एकादशी ने गांव की कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुफ्त में ट्रेनिंग भी दी है.</p>
