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पुरानी कला को सहेजने की कोशिश, ओडिशा के कल्पतरु पांडा बाघमारी दुनिया भर में पहुंचा रहे लकड़ी के मुखौटे की कला

2026-01-14 9 Dailymotion

<p>ओडिशा का बाघमारी जिला लकड़ी के मुखौटों के लिए मशहूर है. इन मुखौटों की मांग देश ही नहीं विदेशों तक में हैं. पहले इन मुखौटों का इस्तेमाल रामलीला और कृष्णलीला तक ही सीमित था. लेकिन अब इसे सजावट के सामान के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. फ्रांस और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों में बाघ के सिर वाले लकड़ी के मुखौटों की डिमांड बढ़ गई है. कल्पतरु पंडा 2014 से लकड़ी के मुखौटे को नई पहचान देने में लगे हुए हैं. साथ ही इन्होंने इस लकड़ी की नक्काशी की कला को एक बिजनेस में बदल दिया है. वो खुद सालाना 12 से 15 लाख रुपये तक कमा रहे हैं. साथ ही इस कला से दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं. वहीं ओडिशा की GI कंसल्टेंट डॉ. अनीता इसे GI टैग दिलाने की कोशिशों में लगी हैं. पहले इन मुखौटों को बनाने के लिए कारीगर सेमल, पलाश की लकड़ी का इस्तेमाल करते थे. लेकिन आज ये मुखौटें महानिम्बा, कदंब और गंभारी की लकड़ी से बनाए जा रहे हैं. कल्पतरु पंडा जैसे शिल्पकार इस विरासत को सहेजने के साथ-साथ आधुनिकता के रंग में रंग कर पहचान दिलाने में लगे हैं.</p>

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