<p>असम के शहरों और गांवों में माघ बिहू का उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. उत्सव की शुरुआत मेजी जलाने के साथ हुई. लोग बांस, पुआल और लकड़ी से मेजी तैयार करते हैं, फिर उसके चारों ओर खड़े होकर उसे जलाते हैं. अच्छी फसल के लिए प्रकृति को धन्यवाद देते हैं. गीत गाकर उसका आभार जताते हैं और खुशियां मनाते हैं. </p><p>यह उत्सव नए फसल चक्र के शुरू होने का भी प्रतीक है. लोगों में अलग तरह का उत्साह होता है. नए कपड़े पहनकर और अच्छे-अच्छे पकवान के साथ लोग खुशियां मनाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.</p><p>मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. कहीं इसे मकर संक्राति तो कहीं पोंगल, कहीं बिहू तो कहीं लोहिड़ी के नाम से मनाया जाता है. यह प्रकृति के साथ-साथ जीवन नए बदलाव का संदेश देता है. </p>
