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विश्व पुस्तक मेले में ‘किताब वाली आंटी’, साहित्य के प्रति अटूट प्रेम की मिसाल हैं संजना तिवारी

2026-01-15 4 Dailymotion

<p>भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में चल रहे विश्व पुस्तक मेले की चकाचौंध के बीच एक स्टॉल ऐसा भी है, जो सादगी, संघर्ष और साहित्य के प्रति अटूट प्रेम की मिसाल बनकर खड़ा है. इस स्टॉल के पीछे खड़ी शख्सियत हैं— संजना तिवारी, जिन्हें मंडी हाउस के रंगमंच से जुड़े लोग प्यार से ‘मिली किताब वाली आंटी’ कहते हैं.</p><p>वह पिछले 25 सालों से दिल्ली के मंडी हाउस पर फुटपाथ से हिंदी साहित्य की खुशबू फैला रही हैं. आज वही संजना प्रगति मैदान के विश्व पुस्तक मेले में अपने प्रकाशन ‘संजना बुक्स’ के साथ मौजूद हैं.</p><p>संजना का परिवार किसी भी मायने में साधारण नहीं है. पति पत्रकारिता से रिटायर हो चुके हैं और लेखक हैं. बेटा डॉक्टर है. दामाद आईपीएस अधिकारी हैं. परिवार संपन्न है, सुविधाओं की कोई कमी नहीं है. इसके बावजूद संजना तिवारी आज भी किताबों की स्टॉल लगाती हैं.</p><p>उनके लिए किताब बेचना मजबूरी नहीं, बल्कि साधना है. वह साफ शब्दों में कहती हैं कि मुझे यह जानने की इच्छा नहीं कि क्या मिला, क्या नहीं मिला. मेरा उद्देश्य सिर्फ करते रहना है. किताबों से प्रेम है, इसलिए करती रहूंगी.</p>

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