<p>ओडिशा के खुर्दा में 103 साल की एक बुजुर्ग महिला इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. एक महिला जो अपनी आंखों से ठीक से देख नहीं पाती है... जो लाठी पकड़कर भी ठीक से चल नहीं पाती है, वो भीख मांग-मांग कर उन पैसों से मंदिरों का निर्माण करा रही है. </p><p>पद्मावती दास के पास रहने के लिए घर नहीं है, लेकिन ईश्वर के प्रति उसकी आस्था ऐसी है कि उसने अपने काम से लोगों का दिल जीत लिया है. उसने अपना सारा जीवन ईश्वर को समर्पित कर दिया है. वो पिछले 25 सालों से मंदिरों का निर्माण करा रही है. उसने अंगुल, धेनकेनाल, जगतसिंहपुर और खुर्दा में कई मंदिर बनवाए. उसने अपने गांव में लक्ष्मी नारायण और महादेव के मंदिर का निर्माण कराया... लेकिन इस मंदिर का काम अभी अधूरा है. </p><p>जब पद्मावती 90 साल की थी, तभी उसे पति गुजर गए. उसे एक बेटा और दो बेटियां हैं. उनकी शादी हो चुकी है. पति जब जिंदा थे तभी पद्मावती ने अपना घर-बार छोड़ दिया और धर्म की डगर पर निकल गई. उम्र के इस पड़ाव में पद्मावती को इस बात की चिंता सता रही है कि मंदिर का निर्माण कैसे पूरा होगा. अब पद्मावती का शरीर साथ नहीं देता, लेकिन उसकी लगन उसे रुकने नहीं देती.</p>
