<br /><br />बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा धर्म क्षेत्र में आने के प्रस्ताव ने प्रशासन, शिक्षा और धर्म जगत में बहस छेड़ दी है। यूजीसी से जुड़े विवादों की पृष्ठभूमि में हुआ यह घटनाक्रम वैचारिक प्रतिबद्धता और सार्वजनिक सेवा के रिश्ते पर सवाल खड़े करता है।<br /><br />
