<p>सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर के गर्भगृह में VIP दर्शन को लेकर लगी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि महाकाल के सामने कोई VIP नहीं, सब बराबर हैं. कोर्ट ने कहा कि अगर लोग आर्टिकल 14, 16, 19, 20 और 21 का हवाला देते हुए गर्भगृह में जाते हैं, तो उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई व्यक्ति इसलिए अंदर जाने का अधिकार मांग सकता है क्योंकि दूसरे को जाने की इजाजत है, या बोलने की आजादी का हवाला देते हुए मंत्र पढ़ने का अधिकार मांग सकता है. सीजेआई ने कहा, इसलिए, सभी मौलिक अधिकार सिर्फ गर्भगृह के अंदर ही रहेंगे. यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने आया. शुरू में, सीजेआई ने याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी की तरफ से वकील विष्णु शंकर जैन से कहा कि कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई नहीं करना चाहता. जैन ने कहा कि यह मामला मंदिर में एंट्री से जुड़ा है. सीजेआई ने कहा कि महाकाल के सामने कोई भी वीआईपी नहीं है. बेंच के याचिका पर सुनवाई से इनकार के बाद याचिकाकर्ता ने इसे वापस लेने का फैसला किया, और संबंधित अधिकारियों के सामने रिप्रेजेंटेशन फाइल करने की छूट दी. याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 28 अगस्त, 2025 के फैसले को चुनौती दी, जिसमें सभी भक्तों को गर्भगृह के अंदर दर्शन और पूजा-पाठ करने की बराबर इजाजत देने की मांग वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दी गई थी.</p>
