<p>समय के साथ क्राइम का पैटर्न बदल रहा है. क्राइम के बदलते ट्रेंड के साथ, अब सिक्योरिटी को और स्मार्ट, तेज़ और ज़्यादा अलर्ट बनाने की ज़रूरत है. इस ज़रूरत को सिक्योरिटी के काम में लगे ट्रेंड डॉग्स और हैंडलर्स ने एक नया आयाम दिया है, जो क्राइम होने से पहले ही उसे रोक देते हैं. इसीलिए डॉग्स और उन्हें कंट्रोल करने वाले हैंडलर्स या हैंडलर्स को ट्रेन करने के लिए अलग-अलग ऑर्गनाइज़ेशन बनाए जा रहे हैं. इंडस्ट्रियल साइट्स की रखवाली, पेट्रोलिंग और एक्सप्लोसिव का पता लगाने के लिए ट्रेंड कुत्तों की ज़रूरत होती है. इंडस्ट्रियल ऑर्गनाइज़ेशन की इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए, इंडियन आर्मी के पूर्व डॉग ट्रेनर दिलीप कुमार साहू ने फ्रंट लाइन K9 फोर्स बनाई है, जहां वे ट्रेंड कुत्तों और हैंडलर्स को तैयार कर रहे हैं. </p><p>K9 सिक्योरिटी और जनरल सिक्योरिटी सिस्टम में बहुत बड़ा अंतर है. वे क्राइम के खिलाफ एक मज़बूत रोकने वाले के तौर पर काम करते हैं. ये यूनिट एक्सप्लोसिव, नारकोटिक्स या संदिग्ध लोगों का पता लगाने और कंस्ट्रक्शन साइट्स और पब्लिक इवेंट्स जैसे ज़्यादा खतरे वाले इलाकों में पेट्रोलिंग करने में खास तौर पर मददगार होती हैं. </p>
