<p>आंध्र प्रदेश के ताडिपत्री का तालारिचेरुवु गांव के लोग घरों से जरुरी सामान ट्रैक्टर पर लाद रहे हैं. कोई मोटरसाइकिल पर सामान लेकर गांव छोड़ रहा है. यहां माघ चतुर्दशी के दिन अजीब सा सन्नाटा है. घरों पर ताले लटक रहे हैं. सड़कें लगभग खाली है. यहां तक कि जानवरों को भी लोग अपने साथ ले कर चले गए है. 24 घंटे के लिए किसी भी घर में लाइट और आग नहीं जलेगी. एक हजार की आबादी वाला ये गांव पूरा खाली हो गया है. इस सबके पीछे एक ब्राह्मण की हत्या और उसका श्राप है. गांव के बड़े बुजुर्ग इस श्राप से मुक्ति के लिए चंद्रगिरी गए. जहां ज्योतिषियों ने उन्हें माघ पूर्णिमा के दिन गांव में आग और दीये नहीं जलाने को कहा. तब से माघ चतुर्दशी की आधी रात से माघ पूर्णिमा की आधी रात तक गांव वाले ‘अग्गिपाडु’ नामक अनुष्ठान का पालन करते हुए बस्ती छोड़ देते हैं. जिसका शाब्दिक अर्थ है आग नहीं. इस दौरान वे पास के गांवों में रिश्तेदारों के साथ रहते हैं. पिकनिक मनाते हैं. सामुदायिक मेलजोल में हिस्सा लेते हैं. पूर्णिमा के बाद फिर इस गांव में जिंदगी पटरी पर लौट आती है. सदियों पुरानी ये परंपरा रविवार को यहां एक बार फिर निभाई गई.</p>
