<p>सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर व्हाट्सऐप और मेटा को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट कहा कि कोई भी कंपनी डेटा शेयरिंग के नाम पर देश की जनता की निजता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकती है. साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर कोई कंपनी भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकती तो उसे यहां पर काम करने का हक नहीं है. </p><p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों की गोपनीयता संबंधी शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की गई है कि आम नागरिक उन्हें समझ नहीं पाएंगे और कंपनियां उनका डेटा चोरी करती रहेंगी. </p><p>आगे सुप्रीमकोर्ट ने पूछा कि प्राइवेसी पॉलिसी में ऑप्ट आउट का ऑप्शन ही कहां है? अगर कोई यूजर डेटा शेयर नहीं करना चाहता है तो उसे इससे बाहर रहने का विकल्प मिलना चाहिए और टेक जाइन्ट्स को इस तरह से डेटा शेयर करने की परमीशन नहीं मिलेगी. </p><p>अब आइये समझते हैं कि पूरा मामला है क्या? कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने नवंबर 2024 में एक आदेश पारित किया गया. आदेश में कहा गया कि व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि यूजर्स पर प्राइवेसी पॉलिसी थोपी गई है. उसमें यूजर्स को ऑप्ट ऑउट करने का विकल्प नहीं दिया गया और ये प्रतिस्पर्धा नियम 2002 के खिलाफ है. इसी आधार पर कंपनी पर 213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया गया.</p><p>दरअसल, मेटा और व्हाट्सऐप ने कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट का रुख किया और उस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ये टिप्पणी की. इस मामले में कोर्ट 9 फरवरी को अंतरिम आदेश सुनाएगा. </p>
