<p>ओडिशा के पुरी के बिशिमतरी गांव की महिलाएं अपने हाथों से अपनी तकदीर लिख रही हैं. जूट से डोर मैट, स्लीपर, पेन स्टैंड, बास्केट, लैपटॉप बैग, लंच बैग, वाटर बॉटल बैग जैसे नए-नए सामान बनाना अब इनका जुनून बन चुका है. </p><p>पहले चूल्हा-चौका करने के बाद ये महिलाएं घर में बैठी रहती थीं. परिवार में गरीबी थी, लेकिन कमाई का कोई जरिया नहीं. बात 2015 की है. टेलरिंग का काम करने वाले अमिय पोद्दार ने कुछ महिलाओं को ट्रेनिंग दी, फिर इन महिलाओं ने टेलरिंग मशीन पर जूट का सामान बनाना शुरू किया. इन सुंदर, टिकाऊ और इको-फ्रेंडली सामान को जिसने भी देखा उन्हें भा गया. फिर ऑर्डर आने लगे, डिमांड बढ़ने लगी. अब तो ओडिशा के बाहर से भी ऑर्डर आ रहे हैं. </p><p>यहां काम करने वाली महिलाओं की संख्या अब बढ़कर 50 हो रही है.. इनकी प्रोडक्शन यूनिट भद्रेश्वर जूट क्राफ्ट प्रोड्यूसर ग्रुप के नाम से मशहूर हो गया है. लेकिन इनकी एक बड़ी समस्या है कि इनके पास काम करने के लिए जगह नहीं है.. जहां सभी महिलाएं एक साथ बैठकर काम कर सकें और ऑर्डर को पूरा कर सकें. </p>
