वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट कहते हैं कि दीपक ने इंसानियत की रक्षा की। भारत के संवैधानिक मूल्यों - धर्मनिरपेक्षता और समानता की रक्षा की। यह आज के दौर में बहुत ही साहस का काम है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राज्य पुलिस का व्यवहार भी दीपक को ‘सबक सिखाने’ जैसा रहा है। घटना के बाद दीपक से मिलने पहुंच रहे लोगों को पुलिस उठाकर थाने ले जा रही थी। दीपक पेशे से जिम संचालक हैं और पहलवानी भी करते रहे हैं। ऐसे में दोनों पेशों के संगठनों ने दीपक के समर्थन में कोटद्वार जाने का ऐलान कर दिया था। पुलिस-प्रशासन के हाथ पांव फूल रहे थे। उनकी कोशिश थी कि दीपक एक अपील जारी कर दें कि वह ठीक हैं और उनके समर्थन में लोग कोटद्वार ना आएं। <br />#deepak #uttarakhand #congress
