भारत रणभूमि दर्शन वाहन रैली पहुंची गडरारोड<br />भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट (तोपखाना) के गौरवशाली इतिहास और बलिदान को लेकर निकाली जा रही भारत रणभूमि दर्शन वाहन रैली के गडरारोड पहुंचने पर स्थानीय कस्बेवासियों ने स्वागत किया। <br />रेलवे अमर शहीदों को दी श्रद्धांजलि <br />रैली का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज नायर, कर्नल आशीष रंजन, बीएसएफ कमांडेंट सुरेंद्रसिंह ने रेलवे शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित किए। इस दौरान बीएसएफ गार्ड टीम ने मातमी धुनों के साथ सलामी दी। दो मिनट का मौन रखा। सभी ने रेलवे अमर शहीद संग्रहालय का अवलोकन किया। यहां 9 सितंबर 1965 की घटना और रेलवे शहीदों की अमरगाथा सुनकर सभी लोग अभिभूत हुए। रेलवे स्टेशन पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल नायर को प्रेमसिंह सोढ़ा, रेलवे स्टेशन अधीक्षक सद्दाम हुसैन ने पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।<br />रैली केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक ज्वाइंट ऑपेरशन <br />कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज नायर ने कहा कि यह रैली केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक ''ज्वाइंट ऑपेरशन'' की तरह है, जिसमें भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। 3,400 किलोमीटर लंबे इस रूट को विशेष रूप से उन रणभूमियों से जोड़ा गया है जहां आर्टिलरी ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना है। अभी तक की यात्रा में गडरारोड में हुए जोरदार स्वागत और सम्मान से अभिभूत हो गए। बॉर्डर पर इस प्रकार का जोश और जुनून देखकर बहुत खुशी हुई। 76 वी वाहिनी के समादेष्टा सुरेंद्रसिंह ने लेफ्टिनेंट कर्नल नायर और वाहन रैली में शामिल सभी अधिकारियों का स्वागत करते हुए स्थानीय ग्रामीणों का आभार जताया। सेवानिवृत सूबेदार कंवरराजसिंह भाटी ने 1971 के भारत पाक युद्ध के ऐतिहासिक जीत के संस्मरण सुनाते हुए सभी का दिल जीत लिया। विद्यार्थी दिनेश कुमार ने तेरी मिट्टी में मिल जांवा... सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स, स्काउट्स, स्कूल विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।<br />बॉर्डर टूरिज्म विकसित करने की रखी मांग<br />कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने देश विभाजन, 1965 भारत पाक युद्ध, 1971 में सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पाकिस्तान की परबत अली पोस्ट, छाछरो फतह,विजय दिवस की यादें साझा की। सीमावर्ती ग्रामीणों ने गडरारोड - मुनाबाव क्षेत्र में बॉर्डर टूरिज्म विकसित करने, वॉर मेमोरियल बनाने की मांग रखी। जिससे देश की भावी पीढ़ी गौरवंतित हो।<br /><br />
