<p> बांग्लादेश अपने सबसे अहम चुनावों में से एक की ओर बढ़ रहा है, जिसमें देश की राजनीतिक दिशा तय करने के लिए लोग 12 फरवरी को अपना वोट डालेंगे. मुख्य मुकाबला कई दलों के गठबंधन की अगुवाई कर रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, और जमात-ए-इस्लामी के बीच है। जमात-ए-इस्लामी भी 11 पार्टियों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, जिसमें छात्र- समर्थित नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है. 67 साल के चिकित्सक और अनुभवी राजनीतिज्ञ शफीकुर रहमान के नेतृत्व में, जमात-ए-इस्लामी वर्तमान में बांग्लादेश का सबसे बड़ा इस्लामी राजनीति दल है. इसकी स्थापना 1941 में हुई थी, जब इसे अविभाजित भारत में एक इस्लामिक संगठन के रूप में शुरू किया गया था। बाद में यह बांग्लादेश में एक राजनीतिक-धार्मिक संगठन में बदल गया. हाल में महिलाओं पर विवादित बयानों की वजह से जमात प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए. हालांकि अब उनके रुख में बदलाव दिख रहा है और वो कहते नजर आ रहे हैं कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करना उनकी प्राथमिकताओं में से एक होगा.यह चुनाव 2024 में हुए उस छात्र विद्रोह के बाद से बांग्लादेश का पहला आम चुनाव है, जिसने शेख हसीना के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया था.</p>
