<p>नई दिल्ली में “वंदे मातरम्” को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कुछ मुस्लिम धर्म गुरुओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि इस्लाम में इबादत केवल अल्लाह की होती है, लेकिन देश के प्रति सम्मान और मोहब्बत से कोई परहेज़ नहीं है। वहीं कई अन्य धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने इसे भारत की आज़ादी के संघर्ष और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा प्रतीक बताया।<br>यह विवाद तब उभरा जब सार्वजनिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में “वंदे मातरम्” गाने को लेकर अलग-अलग राय सामने आईं। समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्र की एकता और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का प्रतीक है, जबकि विरोध करने वाले इसे धार्मिक मान्यताओं के दृष्टिकोण से देखते हैं।</p>
