<p>तमिलनाडु के चेन्नई के पास तांबरम नगर निगम के 'कन्नडापालयम' इलाके लोग गंदगी, बदबू और खराब पानी से परेशान हैं. इलाके में कचरे के पहाड़ी की वजह से जमीन के नीचे का पानी जहरीला हो गया है. नल से निकलने वाला पानी या तो काला होता है या पीला. यहां के करीब 30 हजार लोग पिछले 40 सालों बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं.</p><p>कभी ये इलाका हरियाली और झीलों के लिए जाना जाता था, करीब 60 साल पहले कन्नड़ बोलने वाले लोग यहां आकर बसे थे, जिसकी वजह से इस इलाके का नाम 'कन्नडापालयम' पड़ा. लोग प्रकृति, झील और खेतों के बीच खुशी-खुशी रहते थे, लेकिन फिर यहां कचरा फेंकना शुरू कर दिया गया... और अब यहां एक हजार टन कचरा जमा हो चुका है. इस वजह से यहां की मिट्टी, हवा और पानी अपनी शुद्धता खो चुके हैं. बच्चों और बुजुर्गों में डेंगू, त्वचा रोग, सांस लेने में तकलीफ और दमा जैसी बीमारियां होने लगीं.</p><p>कचरे के ढेर के पास ही एक आंगनबाड़ी केंद्र, एक मिडिल स्कूल और एक प्राथमिक केंद्र है, लेकिन बीमारी की डर से लोग वहां अपने बच्चों को नहीं भेजते हैं. 2018 में ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यहां से कचरा हटाने का आदेश दिया था. तब थोड़े समय के लिए स्थिति सुधरी लेकिन बाद में फिर से कचरे का पहाड़ जमा हो गया. लोगों ने दफ्तरों के चक्कर काटे, विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला.</p>
