<p>अब आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर ठगी करना होगा मुश्किल, क्योंकि आ गई है मेडिसिनल प्लांट की पहचान करने वाली तकनीक. हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बॉयोलॉजी यानी CCMB के वैज्ञानिकों ने DNA बार कोडिंग तकनीक का इस्तेमाल कर एक ऐसा सॉल्यूशन तैयार किया है, जिससे मेडिसिनल प्लांट की बिल्कुल सही-सही पहचान हो पाएगी. </p><p>मेडिसिनल प्लांट की सही पहचान की तकनीक विकसित होने के बाद CCMB के वैज्ञानिक आयुर्वेदिक प्रैक्टिसनर्स और एक्सपर्ट को ट्रेनिंग दे रहे हैं. आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की देखरेख में ये काम हो रहा है. </p><p>अब आइए समझते हैं कि डीएनए बारकोडिंग क्या है? यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें जीवित प्राणियों में मौजूद DNA का छोटा का हिस्सा लेकर उसकी प्रजाति की पहचान की जाती है. इस तकनीक का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है. लेकिन एनिमल की तुलना में प्लांट की DNA बारकोडिंग ज्यादा मुश्किल है. इस समस्या के समाधान के लिए CCMB के वैज्ञानिकों ने प्लांट्स के लिए एक विशेष DNA बारकोड सिस्टम विकसित किया है. </p><p>यहां ये भी समझना जरूरी है कि प्लांट में DNA बारकोडिंग कैसे काम करता है. इस तकनीक में जिस मेडिसिनल प्लांट की पहचान की जानी है, उसका सैंपल लिया जाता है. प्लांट सैंपल से DNA को अलग किया जाता है. फिर उसके प्लांट जीनोम का विश्लेषण करने के लिए उसकी डीएनए सिक्वेंसिंग की जाती है. अंत में उस विश्लेषण के आधार पर उस प्लांट की प्रजाति का DNA बारकोड तैयार किया जाता है. यह DNA बारकोड उस प्लांट की डिजिटल पहचान होती है. </p><p>यह बारकोड डेटा डेटाबेस में स्टोर किया जता है, जहां स्पेशल सॉफ्टवेयर उस सूचना का विशेषण करते हैं. इससे वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट को इस बात का पता चलता है कि कोई मेडिसिनल प्लांट असली है या नकली. CCMB की ये तकनीक मेडिसिनल प्लांट की शुद्धता, गुणवत्ता और सुरक्षा में मील का पत्थर साबित होगी. इस तकनीक से आयुर्वेद में लोगों का विश्वास मजबूत होगा. </p>
