15 फरवरी को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में काशी नागरी प्रचारिणी सभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कवि, आलोचक-विचारक और कला मर्मज्ञ अशोक वाजपेयी ने कहा कि 'जो सबसे तमाशबीन है, वह हमारा बड़ा भारी नायक है, लेकिन तमाशा देखना और कविता सुनना एक ही चीज नहीं है। आजकल ज्यादा लोग, ज्यादातर वक्त तमाशा देखते हैं, और यही नहीं कि तमाशा देखते हैं, वे तमाशा करते भी हैं।' आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध 'कविता क्या है?<br />#ashokvajpayee #aacharyaramchandrashukla
