<p>एक तरफ भारत दुनिया की सबसे बड़ी AI समिट का आयोजन कर रहा है तो दूसरी तरफ वह डीपफेक की समस्या को लेकर भी चिंतित है और सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र-आधारित प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है. </p><p>केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, कई देशों ने उम्र आधारित प्रतिबंधों की जरूरत को स्वीकार किया कि उम्र आधारित कानून होना चाहिए. ये हमारे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट का हिस्सा है. अब हम विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डीपफेक और उम्र आधारित प्रतिबंध को लेकर बातचीत कर रहे हैं कि इस प्रतिबंध का सही तरीका क्या हो और इस पर आगे कैसे बढ़ा जाए?</p><p>केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI इंपैक्ट समिट में डीपफेक की समस्या को लेकर कड़े कानून लाने की बात कही. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि डीपफेक पर हमें बहुत कड़े कानून की जरूरत है. दिन प्रति दिन ये समस्या बढ़ती जा रही है. निश्चित रूप से, इनके नुकसान से हमारे बच्चों और हमारे समाज को बचाने की जरूरत है. हमने इंडस्ट्री के साथ इस पर बातचीत शुरू कर दी है कि जो कानून पहले से है, उसके अलावा और किस कानून की जरूरत होगी. संसद की आईटी कमेटी ने इस पर अध्ययन किया है और उसने इस पर कुछ रिकमांडेशन्स दी हैं.' </p><p>आस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बैन कर रखा है. दूसरे कई देश भी इस पर विचार कर रहे हैं.. उनमें भारत भी शामिल है.</p>
