<p>ओडिशा के मलकानगिरी का सतीगुडा MMD गर्ल्स हायर प्राइमरी स्कूल, इस सेंटर पर लक्ष्मी अपने माता पिता के साथ हाई स्कूल की परीक्षा देने के लिए मोटरसाइकिल से आईं हैं. उनकी मां लक्ष्मी को मोसाइकिल से उतार कर व्हील चेपर पर बैठातीं हैं. एडमिट कार्ड के साथ स्कूल का स्टाफ उन्हें एग्जाम सेंटर के अंदर ले जाता है. व्हील चेयर बैठीं लक्ष्मी धीर-धीरे अपने एग्जाम रुम की तरफ बढ़ रही हैं. मन में पेपर को लेकर उधेड़बून के बीच फंसी लक्ष्मी जब हमारी तरफ देखती है. तो एक धीमी मुस्कान देते हुए आगे बढ़ जाती है.वो अलग कमरे में चटाई पर बैठे कर परीक्षा दे रहीं हैं. उन्हें फर्स्ट लैग्वेज ओडिया भाषा का ए सेट मिला है. एक पैर में पेन फंसाए हुए, दूसरे पैर से प्रश्नपत्र को पलटती हैं और MCQ के सवालों को गंभीरता से पढ़ती है. फिर पैर से लिखना शुरू करती हैं. सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक एग्जाम रुम में ढाई घंटे कैसे बीत गएउन्हें पता ही नहीं चला.एग्जाम देने के बाद जब वो सेंटर से बाहर निकली हैं. तो उनके चेहरे पर पेपर के अच्छा होने की संतुष्टि साफ झलक रही थी. 15 साल की लक्ष्मी के कई अंग खराब हैं. हाथ भी काम नहीं करते हैं. सदर ब्लॉक के सिंधीमल के धेपगुड़ा गांव में रहने वाली लक्ष्मी के पिता पांचवी तक पड़े है और दिहाड़ी पर राजमिस्त्री का काम करते हैं..मां अनपढ़ है. इनके तीन छोटे भाई बहन हैं. गरीबी और तमाम मुश्किलों के बावजूद इस परिवार ने अपनी बेटी की पढ़ाई पर बंदिशें नहीं लगाई. खडे नहीं हो पाने के बावजूद लक्ष्मी मजबूत इच्छा शक्ति और बुलंद हौसले के साथ जीवन में आगे बढ़ रही है. मुश्किल हालातों के बावजूद हार नहीं मानने की ठान चुकी हैं.ये उनके लिए सिर्फ एक एग्जाम नहीं.उनके सपनों और सेल्फ रिस्पेक्ट की लड़ाई है.</p>
