<p>सुप्रीम कोर्ट में NEET PG 2025 के लिए कट-ऑफ में कमी को लेकर सुनवाई हुईं. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कट ऑफ में भारी कटौती पर चिंता जताई और कहा कि क्लालिफाइंगिग पर्सेटाइल में भारी कटौती से मेडिकल के पीजी में शिक्षा की गुणवत्ता पढ़ाई होगी कि नहीं, इसकी जांच करेगा. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ इस कट-ऑफ में कमी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.सरकार की तरफ दाखिल एफीडेविट में कहा गया है कि पर्सेंटाइल में कमी के बाद भी, सीट अलॉटमेंट मेरिट और कैंडिडेट्स की पसंद के आधार पर किया जाता है. इस तरह, यह कदम एकेडमिक स्टैंडर्ड से कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं करता है. ये पॉलिसी देश भर में हेल्थकेयर तक पहुंच बढ़ाने और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के बड़े मकसद से जुड़ी है. सरकार का पक्ष रखते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्यवर्य भाटी ने तर्क दिया कि ये फैसला खाली सीटों को ध्यान में रखते हुए लिया गया . NEET-PG न्यूनतम चिकित्सकीय योग्यता प्रमाणित करने के लिए नहीं बल्कि सीमित सीटों के बीच उम्मीदवारों की तुलना कर चयन करने के लिए आयोजित किया जाता है.क्योंकि सभी अभ्यर्थी पहले से MBBS डिग्रीधारी डॉक्टर हैं. ये विवाद 13 जनवरी 2026 को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज द्वारा जारी नोटिस के बाद से हुआ. जिसमें NEET-PG 2025-26 के तीसरे काउंसलिंग राउंड के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में भारी कमी कर दी गई.</p>
