<p>शराब नीति मामले में बरी होने के बाद दिल्ली की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। अदालत से राहत मिलने के बाद Arvind Kejriwal भावुक नजर आए और उन्होंने साफ कहा— “मैं करप्ट नहीं हूं, पूरा केस फर्जी था।”<br>लेकिन सवाल सिर्फ बरी होने का नहीं है। यह मामला शुरुआत से ही सियासी आरोप-प्रत्यारोप, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और विपक्ष बनाम सत्ता की लड़ाई का केंद्र रहा। क्या यह सच में राजनीतिक साजिश थी? या फिर कानूनी प्रक्रिया का स्वाभाविक निष्कर्ष?</p>
