अहमदाबाद शहर के सिविल अस्पताल के एक कमरे में जहां एक ओर प्रार्थना हो रही थी, वहीं दूसरी ओर कलमा पढ़ा जा रहा था। यह भावनात्मक दृश्य उस वक्त उभरा जब दो परिवारों ने अपनों को खोने के बावजूद अंगदान के लिए स्वीकृति दी। पवित्र रमजान माह में जब पूरा मुस्लिम समाज खुदा की इबादत में लीन है, तब जूनागढ़ के एक मुस्लिम परिवार ने अपनी प्रिय महिला सदस्य जिबुन चावड़ा के अंगों का दान कर मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह अस्पताल में मुस्लिम परिवारों की ओर से किए गए अंगदान का नौवां मामला था। 14 घंटों के भीतर एक अन्य परिवार ने भी अपनी 25 वर्षीय बेटी के अंगों का गुप्त दान किया। इन दोनों परिवारों की ओर से छह (तीन-तीन) अंगों का दान किया गया। इन अंगदानों ने न केवल धार्मिक आस्थाओं को, बल्कि मानवता के सिद्धांतों को भी मजबूत किया। इससे कुल छह लोगों को नया जीवन मिल सकेगा।
