<p>राजस्थान के बूंदी में चावल किसानों और व्यापारियों पर पश्चिमी एशियाई संकट का बुरा असर पड़ रहा है. बूंदी को राज्य में 'चावल का कटोरा' कहा जाता है. यहां ना सिर्फ बासमती चावल उगाया जाता है, बल्कि बड़ी संख्या में उच्च गुणवत्ता वाले चावल को संसाधित करने की मिलें भी हैं. यहां से चावल खास कर मध्य पूर्व और यूरोप को निर्यात होता है. चावल का निर्यात स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. व्यापारियों की शिकायत है कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट की वजह से उनकी खेप बंदरगाहों और थोक बाजारों में फंसी हुई है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है.</p><p>अर्थव्यवस्था की रीढ़ होने के नाते, चावल उद्योग की स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका है. कुछ लोगों को आशंका है कि लंबे समय तक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट बनी रही तो कई लोगों की आजीविका ठप हो जाएगी. बूंदी में किसान और चावल व्यापारी - दोनों ही सरकार से इस हालात से निपटने और नुकसान की भरपाई के लिए उपाय करने की अपील कर रहे हैं. </p>
