<p>बिहार के गया जिले के मटिहानी गांव में निर्मित एक झोपड़ा आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन भारतीय आयुर्वेद का अनोखा मेल है. आज के समय में जब कंक्रीट और सीमेंट के अंधाधुंध इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं यह निर्माण बिना सीमेंट' और बिना पानी के प्रयोग कर बनाया गया है. जिसकी तारीफ इंजीनियर तक कर रहे हैं. पंचगव्य चिकित्सा के अनुसार, मौसम अनुकूल यह झोपड़ा पूरी तरह से एंटीवायरस है. इस झोपड़े की खासियत है कि इसमें ईंट तो लगाई गई है, लेकिन पानी और सीमेंट का तनिक भी उपयोग नहीं किया गया है. पुराने जमाने में जब झोपड़ी या कच्चे मकान बनते थे, उसमें पानी का उपयोग किया जाता था. वहीं इस झोपड़ी के निर्माण में पानी की जगह गोमूत्र का इस्तेमाल किया गया.</p>
