<p>तमिलनाडु में सिनेमा और सियासत के बीच हमेशा से चोली-दामन का साथ रहा है. पहले भी फिल्मी सितारों ने सियासत की दहलीज पार की है. कभी कामयाब रहे हैं तो कभी नाकामी हाथ लगी है. राजनीति के मैदान में नए खिलाड़ी हैं - विजय. सवाल ये नहीं है कि वे कितने लोकप्रिय हैं। सवाल है कि क्या उनकी लोकप्रियता वोटों में तब्दील होगी?</p><p>विजय ने सिनेमा जगत में पिता, एस. ए. चंद्रशेखर के निर्देशन में कदम रखा। तमिल फिल्म उद्योग में उनके शुरुआती साल अनिश्चितता भरे थे. उन्हें लुक्स, स्क्रीन प्रेजेंस और यहां तक कि अभिनय में गंभीरता के अभाव को लेकर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. बुलंद हौसले रंग लाने लगे. धीरे-धीरे लोगों की सोच बदलने लगी. समय का पहिया आगे बढ़ा तो फिल्मों में ना सिर्फ उनकी पहचान लोकप्रिय एक्शन स्टार के रूप में बनी, बल्कि वे एक ऐसे नायक के रूप में भी उभरे, जिसके किरदारों में नैतिक संदेश होते थे. अब वो नेता के रूप में जनता के बीच हैं. </p>
