<p> सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और खुलकर उस धर्म का पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं रह जाता. बेंच ने साफ किया कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता. अदालत ने कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है. यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और एक पादरी के रूप में काम कर रहा था. उसने कुछ लोगों के खिलाफ 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज कराया था, जिन्होंने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की थी. उस व्यक्ति ने SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा की मांग की थी.</p>
