<p>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में आदेश दिया कि सेना, नौसेना और वायुसेना की वे महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी, जिन्हें परमानेंट कमीशन देने से मना कर दिया गया था, वे अब पूरी पेंशन लाभ की हकदार हैं. यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया. बेंच ने कहा, "हमने पाया कि महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन न देना केवल व्यक्तिगत मूल्यांकन का नतीजा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी प्रणालीगत व्यवस्था का परिणाम था जो उन धारणाओं पर आधारित थी जिनसे करियर में भेदभाव पैदा हुआ. जहां उनके प्रदर्शन को आंकने का तरीका पुरुषों के मुकाबले उतना गहरा और निष्पक्ष नहीं था, उन आकलनों ने अनिवार्य रूप से उनके सर्विस रिकॉर्ड, योग्यता और करियर की प्रगति को प्रभावित किया." बेंच ने आगे कहा, "इसलिए, हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करना उचित समझते हैं, ताकि दोनों पक्षों के बीच पूर्ण न्याय करने के लिए उचित राहत दी जा सके." बेंच ने कहा कि 2019, 2020 और 2021 में आयोजित बोर्डों द्वारा जिन शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को पहले ही परमानेंट कमीशन (PC) दिया जा चुका है, उनके दर्जे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. यह फैसला विंग कमांडर सुचेता ईडन और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है, जिसमें 2019 के नीतिगत बदलावों और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के पुराने फैसलों के आधार पर उन्हें परमानेंट कमीशन न दिए जाने को चुनौती दी गई थी.</p>
