<p>असम के होजाई और जमुनामुख में फिलहाल बाढ़ जैसे हालात नहीं है. बावजूद उसके इन क्षेत्रों में अतीत में आई बाढ़ की दहशत का प्रभाव स्पष्ट रूप से यहां के लोगों के मन पर हावी है. ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों जमुना और कपिली के किनारे बसे ये निर्वाचन क्षेत्र सूबे के सबसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में से एक हैं. यहां के लोगों का कहना है कि बाढ़ ये पैटर्न लगातार बना हुआ है- जब भी नदियों में थोड़ा भी जल स्तर बढ़ता है, उससे घरों, फसलों को काफी नुकसान पहुंचना है और बुनियादी संपर्क व्यवस्था में अड़चन आती है. कुछ लोगों का कहना है कि बाढ़ से न केवल मानव जीवन की हानि होती है बल्कि पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचता है, जिससे यहां की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है. यहां रहने वालों के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढांचा चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है. उनका कहना है कि बाढ़ का पानी अक्सर उन्हें कमजोर तटबंधों और खराब सड़कों के किनारे रहने के लिए मजबूर करता है, जिससे स्थिति और भी बदतर हो जाती है. इस साल विधानसभा चुनावों से पहले होजाई और जमुनामुख में रहने वाले लोगों को आशा है कि राजनीतिक दल अग्रिम तैयारियों में सुधार करने और बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए मजबूत उपायों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे. 126 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए मतदान नौ अप्रैल को होगा और वोटों की गिनती चार मई को होगी.</p>
