<p>कुछ महीने पहले तक चलन से तकरीबन बाहर हो चुके मिट्टी के चूल्हों और अंगीठियों की मांग इन दिनों काफी बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के बाजारों में पारंपरिक चूल्हे फिर से नजर आने लगे हैं. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण रसोई गैस की आपूर्ति में कमी की वजह से इन चूल्हों की मांग फिर से होने लगी है. दुकानदारों का कहना है कि यह रुझान सभी बाजारों में दिखाई दे रहा है और कोयले की बिक्री में भी तेज़ी आई है.</p><p>एक तरफ रसोई में बीते दौर के चूल्हों के बीच सरकार का दावा है कि उसने पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है. खास तौर पर घरों और आवश्यक सेवाओं के साथ साथ रिफाइनरी में उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा एलपीजी रिफिल अंतराल को बढ़ाकर मांग का भी प्रबंधन करने की कोशिश की है.</p>
