<p>केरल के कोट्टयम जिले में पाला एक ऐसा कस्बा है, जहां ईसाई आबादी बहुसंख्यक है. पांच दशकों से अधिक समय तक केरल कांग्रेस के केएम मणि का इस निर्वाचन क्षेत्र पर दबदबा रहा और 2019 में उनके निधन तक वे यहां से हर चुनाव जीतते रहे. मणि के निधन के बाद राजनीतिक माहौल में नाटकीय बदलाव आया. मणि परिवार का कभी निर्विवाद वर्चस्व रहा ये दबदबा धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा और 2019 में मणि की मौत के बाद हुए उप-चुनाव में मणि सी. कप्पन ने केरल कांग्रेस (मणि) के उम्मीदवार को हरा दिया.</p><p>इससे पहले एनसीपी गुट के एलडीएफ के साथ गठबंधन में रहने के बाद कप्पन 2021 के चुनावों से पहले यूडीएफ में शामिल हो गए और उस साल दिवंगत केएम मणि के बेटे को हराकर सीट बरकरार रखी. इस साल चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें तीन प्रभावशाली ईसाई परिवारों के उम्मीदवार तीन प्रमुख राजनीतिक मोर्चों की ओर से मैदान में हैं. </p><p>राजनीति में आने से पहले फिल्म निर्माता के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले मौजूदा विधायक और यूडीएफ उम्मीदवार मणि सी. कप्पन एक बार फिर मैदान में हैं और अपने प्रदर्शन और विकास कार्यों का हवाला देते हुए दावा करते हैं कि पाला की जनता पूरी तरह से उनके साथ है.</p>
