<p>मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार पर साफ दिखने लगा है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों में करीब 36 लाख नौकरियां खतरे में हैं. बेरोजगारी दर में लगभग 4 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, जिससे करीब 40 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं. इस संकट का सबसे बड़ा असर उन भारतीयों पर पड़ सकता है जो खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं. अनुमान है कि इस क्षेत्र में 90 लाख से 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, जो हर साल भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजते हैं. जंग के चलते हजारों भारतीय अपनी नौकरी खो सकते हैं और कई लोगों को वापस लौटना पड़ सकता है. इसके अलावा, रियल एस्टेट, सप्लाई चेन और भारत की अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.</p>
