<p>भारतीय महाद्वीप की फीमेल प्लेबैक सिंगर्स में जिन दो महान हस्तियों का नाम बरबस ही लोगों की जुबान पर आ जाता है, उनमें पहले स्थान पर हैं आशा भोसले की बड़ी बहन लता मंगेशकर और दूसरे स्थान पर खुद आशा भोसले, जिन्होंने अपने टेलेंट और जिद के दम पर दशकों तक संगीत प्रमियों के दिलों पर राज किया. </p><p>आशा जी सुर साधना के बीच पलीं-बढ़ीं.. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता और मराठी रंगमंच से जुड़े थे. घर में उनके पांच बच्चों- लता, मीना, आशा, ऊषा और पुत्र हृदयनाथ के बीच सुरों की महफिल बचपन से ही सजती थी. बचपन में ही लता जी पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई.. फिर तो आशा जी भी उनके संघर्ष में साथी बन गईं.</p><p>वैसे तो आशा जी ने साल 1948 में फिल्म 'चुनरिया' से प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा, लेकिन शुरुआती समय में उन्हें वो सफलता नहीं मिली जो लता जी को मिली थी. सफलता के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा.. बाद के दिनों में उन्होंने गायिकी की ऐसी लकीर खींची जो अमिट हो गई. उन्होंने अलग-अलग भाषाओं में 12 हजार से भी ज्यादा गाने गाए. </p><p>साल दर साल गुजरते रहे, बॉलीवुड में एक्ट्रेस बदलती रहीं.. संगीत के साज बदलते रहे.. लेकिन नहीं बदली तो वो है आशा जी की आवाज.. हर आवाज में उनकी ताजगी.. नया दौर से लेकर... रंगीला हो या लगान या फिर ताल.. आशा जी ने हर दौर का स्वागत किया.. अब भले ही वो नए दौर का स्वागत करने के लिए खुद मौजूद नहीं रहेंगी.. लेकिन उनका अंदाज आने वाले हर दौर को नई ऊर्जा देता रहेगा. </p>
