<p>जमीन के बदले नौकरी मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद को सुप्रीमकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने इस मामले में उनके और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज सीबीआई की FIR और आरोप पत्र को रद्द करने से इनकार कर दिया. हालांकि सुप्रीमकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्हें पेशी से छूट दी है. सुप्रीमकोर्ट ने साफ किया कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला लेने का अधिकार ट्रायल कोर्ट के पास रहेगा यानी निचली अदालत मेरिट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी. </p><p>मामला साल 2008 का है. तब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे. पटना के किशुन देव राय ने अपनी 3,375 स्क्वायर फीट जमीन सिर्फ 3.75 लाख में लालू प्रसाद की पत्नी रबड़ी देवी के नाम कर दी. इसी साल किशुन देव राय के परिवार के तीन लोगों को रेलवे में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिल गई. </p><p>लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों पर रेलवे में नौकरी देने के नाम पर जमीन लेने का आरोप लगा. 2022 में सीबीई ने लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया. CBI का आरोप है कि लालू प्रसाद ने बिहार में एक लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख में ले ली. </p><p>इस मामले में लालू परिवार समेत 41 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई. जिनमें लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी यादव, बेटी मीसा भारती और हेमा शामिल हैं. </p>
